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राज्यपाल सुश्री उइके से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमण्डल ने भेंट कर ज्ञापन सौंपा


  1. खरसिया ।

    04जनवरी राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से आज राजभवन में छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष श्री बी.एस. रावटे के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए विभिन्न आदिवासी समुदायों जिसमें गोंड, धनवार, कोल, कमार, नगरची, सावरा, बैगा, बिंझवार, कोरवा, कोंड, गजवा, नगेसिया, प्रधान, पंडो, धनवा, गजवा, पाव, धुलिया, भैना, बंधु, समाज के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। समाज प्रतिनिधियों ने वर्तमान आरक्षण विधेयक पर भी अपने विचार व्यक्त किये।
    राज्यपाल सुश्री उइके ने प्रतिनिधिमण्डल को भरोसा दिलाया कि आदिवासियों के हितों के संरक्षण के लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगी। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की समस्याओं के निराकरण के लिए वे स्वयं जिलों का दौरा करेंगी और स्थानीय प्रशासन को आदिवासी समुदाय की कठिनाईयों को तत्काल हल करने के निर्देश देंगी। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के साथ वे किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगी। उन्होंने कहा कि संविधान में प्रावधान होने के बाद भी आज भी अनेक क्षेत्रों में आदिवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
    राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि आदिवासियों की आय का प्रमुख स्रोत लघु वनोपज है। छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों की बोनस राशि एवं विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति न मिलने के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल वन विभाग को इस समस्या को हल करने के निर्देश दिए, जिसके फलस्वरूप आदिवासियों के खाते में बोनस जमा की गई और विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
    राज्यपाल ने कहा कि 12 जनजातीय समुदाय के लोगों ने मुझे अपनी समस्या को लेकर ज्ञापन दिया था कि उनके जाति के नाम में मात्रात्मक त्रुटि होने के कारण उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल नहीं किया गया। इस पर विशेष ध्यान देते हुए मैंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से मिलकर इनकी समस्याओं का समाधान करने का आग्रह किया था। गत वर्ष इन 12 समुदायों को जनजातीय की सूची में शामिल करने का आदेश जारी किया गया है।
    राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कार्यकाल के दौरान लगातार जनजाति समुदाय से लिखित शिकायत और अपील मिलती थी, जिस पर तत्काल प्रभाव से समस्या निवारण की दिशा में समुचित कदम उठाये गये हैं। अपीलों और शिकायतों में प्रमुख रूप से जनजातियों की भूमि पर अवैध कब्जे, भूमि अधिग्रहण, उत्पीड़न और संवैधानिक संरक्षण संबंधी मामले रहे हैं। उनके द्वारा मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को संज्ञान में रखते हुए प्रशासन को नोटिस जारी कर शीघ्र कार्यवाही कराई गई। इसके अलावा भी जनजातियों से संबंधित नीतिगत मुद्दों पर भारत सरकार एवं राज्य सरकारों को सुझाव देकर कई समस्याओं का समाधान कराया गया है। राज्यपाल ने आरक्षण विधेयक के संदर्भ में कहा कि उनके द्वारा संविधान सम्मत कार्यवाही की जाएगी ताकि आदिवासियों को उनका संवैधानिक अधिकार मिल सके।
    बैठक में प्रतिनिधियों ने राज्यपाल सुश्री उइके का आभार जताया कि उन्होंने आदिवासियों के हितों के संरक्षण के लिए काफी सार्थक प्रयास किए और उनके प्रयासों के फलस्वरूप ही प्रदेश के 12 जनजातीय समुदाय को उनका हक मिलेगा। प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि राज्यपाल सुश्री उइके के पद पर रहते हुए आदिवासियों के अधिकारों का हनन नहीं होगा, क्योंकि वे इस संदर्भ में अत्यंत जागरूक हैं।
    प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष बी एस रावते, प्रदेश सचिव विनोद नागवंशी,फडिंद भोई, प्रदेश युवा अध्यक्ष प्रभाग परते, जिसमें रायगढ़ जिले से जिला अध्यक्ष बी एस नागेश, अमृतमणि परजा, महिला जिला अध्यक्ष सोमती सिदार, जिला अध्यक्ष युवा महिला अर्चना सिदार, उपाध्यक्ष दिजोरी सिदार,भवनी सिंह सिदार, भूमिया समाज प्रमुख बलभद्र सिदार,, धनंजय राठिया,डी के नागरे, सहित सर्व आदिवासी समाज के 42 जनजाति के लोग कांकेर से सरगुजा तक और कवर्धा से लेकर महासमुंद तक सभी जिलों के सामाजिक कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे|
    साथ ही सभी ने अपने जिले में समाज के कार्यक्रम में उपस्थित होने का आमंत्रण देते हुए आने का आग्रह किया।
    इस अवसर पर उक्त जनजाति समाज के अध्यक्षों द्वारा वर्तमान आरक्षण विधेयक एवं उस पर भी अपने अपने विचार व्यक्त किये ।

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