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छत्तीसगढ़

विवेचना का स्तर सुधारने के उद्देश्य से 01 दिवसीय ‘‘विवेचकों का प्रशिक्षण’’ कार्यशाला का आयोजन किया गया

उक्त कार्यशाला में सर्वप्रथम पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल द्वारा ऐसे विवेचक जिनकी विवेचना पर माननीय न्यायालय द्वारा आरोपियों को दोषसिद्ध किया गया है ऐसे विवेचक निरी. मनीष परिहार, सउनि राम प्रसाद बघेल, सउनि दिलीप सिंह, सउनि बलवंत सिंह, सउनि रामखिलावन साहू, प्र.आर. लक्ष्मीकांत कश्यप एवं प्र.आर. जगदीश अजय को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए विवेचना एक प्रकार से तकनीकी कार्य है जिसमें विवेचकों को विषय की संपूर्ण जानकारी होने से विवेचना के स्तर को उच्चकोटि का बनाये रखने को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यशाला की आवश्यकता पर जोर दिया गया । उक्त उद्बोधन पश्चात प्रशिक्षण कार्यशाला प्रारंभ किया गया ।

जिले के उप संचालक लोक अभियोजन अधिकारी श्री एम.एल.पाण्डेय द्वारा विवेचना में सुधार विषय पर प्रशिक्षार्थियों को विवेचना दौरान ध्यान देने योग्य आवश्यक तथ्यों की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों द्वारा विवेचना दौरान विभिन्न प्रकार के उत्पन्न होने वाली समस्याओं के संबंध में प्रश्न पुछे गये जिनका श्री पाण्डेय जी द्वारा जवाब देकर समाधान किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में श्री जी.पी.मालवीय सेवा निवृत्त उप संचालक लोक अभियोजन अधिकारी द्वारा पॉक्सो एक्ट एवं एन.डी.पी.एस एक्ट के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। श्री मालवीय द्वारा पाक्सो एक्ट की बारिकियों एवं पाक्सो एक्ट के संबंध में पीड़िता की पहचान के विधिक प्रावधानों एवं माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीड़िता की पहचान, उसके कथन लेने के तरीके इत्यादि के संबंध में तथा एन.डी.पी.एस. एक्ट में अनिवार्य विधिक प्रावधानों का पालन करने, बरामद सामाग्री के जप्ती से लेकर अभियोग पत्र पेश करने तक की प्रक्रिया को बारीकी से बताया गया। प्रश्न उत्तरी कालखण्ड में श्री मालवीय जी द्वारा दोनों विषयों से संबंधित प्रशिक्षणार्थियों द्वारा पूछे गये प्रश्नों/शंकाओं का समाधान किया गया।

प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में माननीय अध्यक्ष किशोर न्याय बोर्ड श्री शिव प्रसाद त्रिपाठी द्वारा बाल अपराध के संबंध में किशोर न्यायालय में पेश करने वाले प्रकरणों में व्यस्कों से संबंधित मूल चालान सहित संलग्न संपूर्ण दस्तावेजों की सत्यापित प्रति संलग्न करने, अपचारी बालके के संबंध में नियम 8 का पूर्णतः पालन करने, उम्र के संबंध में जे.जे.एक्ट के धारा 94 का पालन करने एवं बालकों के सर्वोत्तम हित का ध्यान रखने इत्यादि बातों को समझाईश दी गई। माननीय सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री गितेश कौशिक द्वारा पीड़ित छतिपूर्ति एवं पुनर्वास के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

माननीय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) जांजगीर श्री खिलावन राम रिगरी द्वारा पॉक्सो एक्ट में पीड़िता की पहचान किसी भी स्थिति में उजागर न हो इस बात का ध्यान रखने, पीड़िता की आयू संबंधी साक्ष्य को किस प्रकार संकलित करना है, विवेचक द्वारा पीड़िता को अपने नाम/पदनाम इत्यादि की जानकारी देने, डॉक्टर द्वारा प्रिजर्व किये गये रासायनिक परीक्षण से संबंधित प्रदर्शों को समय पर जांच हेतु प्रेषित करने सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए पूर्व में दिये गये प्रशिक्षण का विवेचकों द्वारा पालन करने पर संतोष व्यक्त किया गया तथा इसी तरह से आज के सेमीनार में दिये गये दिशा-निर्देशों का भी पालन करने की अपेक्षा की गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आमंत्रित मुख्य वक्ता माननीय विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) जांजगीर श्री खिलावन राम रिगरी, माननीय अध्यक्ष किशोर न्याय बोर्ड श्री शिव प्रसाद त्रिपाठी, माननीय सचिव जिला विधक सेवा प्राधिकरण श्री गितेश कौशिक, उप संचालक लोक अभियोजन अधिकारी श्री एम.एल.पाण्डेय एवं सेवा निवृत्त उप संचालक लोक अभियोजन अधिकारी श्री जी.पी.मालवीय का पुष्प गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री सुरेश साहू, जिला लोक अभियोजन अधिकारी, श्री सोनू अग्रवाल लोक अभियोजन अधिकारी अकलतरा, श्रीमती मनीषा लोक अभियोजन अधिकारी जांजगीर, श्री सुधीर कुमार अभियोजन अधिकारी जैजैपुर, श्री अनिल सिंह अभियोजन अधिकारी मालखरौदा, श्री श्याम गुप्ता अभियोजन अधिकारी डभरा एवं नव पदस्थ अभियोजन अधिकारीगण एवं जिले के 56 विवचेक सभागार में एवं काफी संख्या में अलग-अलग थानों से विवेचकगण वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहें।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अनिल सोनी द्वारा कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया।

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