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छत्तीसगढ़

सिटी बसें खड़े-खड़े बनी कबाड़:यात्रियों को ऑटो में स्टेशन से नेताजी चौक तक 20 तो कलेक्टोरेट जाने देना पड़ रहा 50 रुपए किराया

कोरेाना के कारण बंद की गई सिटी बस की सुविधा आज तक शुरू नहीं हो पाई है। कोरोना के दौरान बस संचालक ने बसों को जहां तहां रख दिया। उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए यही वजह है कि अब ये बसें कबाड़ में बदल गई है।

सिटी बसों के नहीं चलने का सीधा नुकसान यात्रियों को हो रहा है। ऑटो वालों ने दाम बढ़ा दिए। स्टेशन से नेताजी चौक तक 20 रुपए तो कचहरी चौक तक आने के लिए एक यात्री को 25 रुपए तक देने पड़ते हैं, जबकि सिटी बस में यहां तक का सफर 10 रुपए में हो जाता था। वहीं कलेक्टोरेट तक जाने के लिए शेयर टैक्सी में एक व्यक्ति को 50 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं तो बुकिंग करके जाने में 200 रुपए देने पड़ रहे हैं। जिले में सिटी बस का संचालन वर्ष 2015 में शुरू हुआ था। जिला मुख्यालय को चांपा, अकलतरा, बलौदा, शिवरीनारायण के लिए 10 सिटी बसें मिलीं। इनमें से चुनिंदा बसों का संचालन ही जांजगीर-अकलतरा-चांपा के बीच हो सका। इसके बाद अकलतरा से शिवरीनारायण के बीच एक बस शुरू की गई। जिसे सिटी बससंचालक ने पामगढ़ में प्रायवेट बस चलाने वाले को ठेका पर दे दिया है। करीब 4 बसें ही रोड में दौड़ती रहीं। 6 बसें नैला टर्मिनल में ही खड़ी रही। रखरखाव के अभाव में बसों के अधिकांश पार्टस गायब हो चुके हैं। बस के सामने लगे शीशे टूट गए है।

सिटी बस कोरोना संक्रमण आने के बाद से दो वर्ष से बंद है। कोराेना संक्रमण के समय सिटी बस के साथ प्राइवेट ट्रेवल कंपनियों ने बस चलाना बंद कर दिया था। परन्तु उन्होंने कोरोना कम होता देख सड़क पर यात्रियों के लिए बस उतार दी। मगर इस बार बस संचालकों ने डीजल के दाम बढ़ने पर पहले से दोगुना किराया बढ़ा दिया जिसके कारण अब आम नागरिकों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे है। जबकि कोरोना के समय से बंद सिटी बसों के पहिए अभी भी थमे हुए हैं।

30 किमी सफर के लिए किराया 50 रुपए
जिला मुख्यालय से डायरेक्ट बिलासपुर जाने के लिए एक भी बस नहीं है और न ही आने के लिए। बिलासपुर मुलमुला होते हुए शिवरीनारायण रूट के लिए लगभग 60 से अधिक बसें है। जिनके संचालक डीजल का दाम बढ़ जाने का हवाला देकर 30 किमी का 50 से 60 रुपए तक किराया वसूल रहे हैं। पिछले कुछ सालों से किराया को लेकर किसी भी प्रकार का रेट निर्धारित नहीं किया गया है। साथ ही प्राइवेट बस में डेली आना जाना करने वाले सा स्कूल कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किराए को लेकर परेशानी हो रही है।

ऐसा हाल.. चक्के, सीट गायब, पत्थर पर टिकी
कोरेाना के कारण बंद हुई सिटी बसों का संचालन पिछले दो साल से शुरू नहीं हो पा रहा है। सिटी बस कंडम स्थिति में नैला टर्मिनल पर जहां तहां खड़ी हैं। बसों के दो साल से उपयोग नहीं होने के कारण इन बसों के चक्के,सीट व अन्य पार्ट्स गायब हो गए हैं। बसों को पत्थरों में टिकाकर रख गया है। ऐसी स्थिति में एक भी सिटी बस को नही चलाया जा सकता। बसों को फिर से रोड लाने के लिए लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे। ऐसे में इन बसों का चलना अब मुश्किल नजर आ रहा है।

आॅटो में दोगुना किराया, लोकल यात्रा में दिक्कत
लगातार बढ़ रहे पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने के साथ ही अब जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों को ऑटो में दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। चांपा से जांजगीर ऑटो से आने पर राहगीरों को 30 से 40 रुपए तक चुकाना पड़ रहा है। इसी तरह जांजगीर से अकलतरा, बलौदा, पहरिया की ओर से आने वाले राहगीरों को ऑटो में किराया 50 रुपए तक देना पड़ रहा है। अकलतरा स्टेशन से पामगढ़ या मुलमुला जाने के लिए यात्रियों को 40 से 50 रुपए देने पड़ रहे है। देर शाम होने का बाद इन क्षेत्र में जाने के लिए कोई साधन नहीं होता।

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