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छत्तीसगढ़

*ज्ञान दीपक जैसे है भक्ति मणि जैसी ज्ञान का अहंकार हो सकता है भक्ति का नहीं-राजन जी*

*खरसिया के लोगों की भक्ति भाव देखकर लगा जैसे मैं अयोध्या में कथा सुना रहा हूं*

खरसिया से कैलाश शर्मा की रिपोर्टआज धार्मिक नगरी खरसिया की धन्य धरा पर पधारे विश्व विख्यात श्री राम कथा वाचक पूज्य श्री राजन जी महाराज द्वारा खरसिया के श्री हरिराम सुल्तानिया कन्या विवाह भवन में प्रेस वार्ता आयोजित की गई जिसमें पूज्य राजन जी महाराज द्वारा सत्य सनातन धर्म की संपूर्ण व्याख्या की गई उन्होंने बताया कि सिर्फ सनातन धर्म ही धर्म है बाकी सब पंथ हैं सनातन धर्म की उत्पत्ति जीव मात्र की उत्पत्ति के साथ ही हुई है सनातन धर्म आदि है अनंत है इसकी व्याख्या करना मुमकिन नहीं है।

यहां यह बताना अति आवश्यक होगा कि श्री राजन जी महाराज की मधुर वाणी साफ और कर्णप्रिय है तथा मानस के हंस गोस्वामी श्री तुलसीदास जी रचित श्री रामचरितमानस का व्याख्यान उनके द्वारा इतना सरल श्रद्धा पूर्वक हुआ है कि भक्त श्री राम की भक्ति में अंतर्मन से मन विचार और कर्म सहित डूब जाता है।

आगे पत्रकार वार्ता में उन्होंने पत्रकारों से सनातन धर्म के संबंध में विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि

हिंदुस्तान में हिंदुत्व की बात करनी पडती है तो वह दुख की बात है यह हमारे रक्त में होने चाहिए यह हमारे व्यवहार में होना चाहिए कि हम हिंदू हैं। उसके लिए जीना मरना चाहिए भले ही राजनीतिक परिक्षेत्र में कुछ भी हो जो हिंदुस्तान में रहता है वह हिंदू कहलाता है हिंदू कोई धर्म नहीं है धर्म का आदि और अंत का पता नहीं है आज सनातन ही हिंदुओं का धर्म है और उस को बढ़ाना चाहिए और इसे बढ़ाने के लिए कुछ लोगों की मुख्य भूमिका है *जैसे पत्रकार* अदाकार चित्रकार नीति का यह सभी समाज के स्तंभ है हम धर्म को किस प्रकार बढ़ाए यह सभी का कर्तव्य है गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए चाहे कोई भी सरकार कहीं पर भी हो क्योंकि विदेशों में से आए लोगों ने भी यह माना है की भारत की देसी गाय में कुछ ऐसे तत्व हैं जो कहीं नहीं मिलते हैं।

 

*युवाओ में भक्ति का भाव पैदा या जागृत होना बड़े शुभ संकेत है*

 

युवाओं में धर्म के प्रति जागृति आई है क्योंकि इसका कारण यह है कि पहले से ही युवाओं में बचपन से ही धर्म के बीज सुसकता में पड़े हुए थे आज भजन एवं कीर्तन के माध्यम से उन बीजों में भक्ति रूपी जल पढ़ने पर अब वे अंकुरण हो रहे हैं l इससे युवाओं के अंदर जो भावनाएं घर में के प्रति नहीं थी अब अधिकांश युवाओं में धर्म की और आस्था आने लगी है और यह अंकुरण अब वृक्ष के रूप में तैयार हो रहा है अतः धर्म के प्रति युवाओं का आकर्षण एक अच्छी बात है

जहां अधिक श्रोता होते हैं वहां वक्ता को आनंद आता है रसिक श्रोता जहां होता है वहां आनंद का भंडार होता है

श्रोताओं का भाव आंखों से दिखता है उसे व्याख्या व्याख्या नहीं की जा सकती आंखें झूठ झूठ नहीं बोलती जिस प्रकार से खरसिया में राम कथा सुनने में और सुनाने में जो आनंद आ रहा है वह एक विशेष लगाओ सा लगता है

ज्ञान दीपक है भक्ति मणि है ज्ञान में दीपक जैसी भक्ति है मणि के समान ज्ञान जैसा अहंकार नहीं है क्योंकि मैंने शब्द का मतलब अहंकार होता है यदि हमें हनुमान चालीसा याद है और हम यह कहते हैं कि हमें तो हमें हनुमान चालीसा याद है तो यह अहंकार होगा अतः जब भी कोई चीज जैसे हनुमान चालीसा को अगर अपने पास किताब है तो उसको पढ़ना चाहिए भक्ति रुपी मणी को अपने मन रूपी चौखट में रखना चाहिए जिससे भक्ति रूपी मणि का प्रकाश अपने मन को एवं दूसरों को भी इसको भक्ति का प्रकाश मिलता है जिस प्रकार ज्ञान रूपी दिये को जलाने के लिए दीपक बाती तेल और माचिस की जरूरत पड़ती है और उसको जलाने के बाद भी अहंकार रूपी ज्ञान हवा में बुझा देता है परंतु भक्ति रूपी मणी जोकि स्वयं प्रकाश मान है इसको कोई नहीं बुझा सकता है इसका प्रकाश हमेशा चारों और भी करता है उसी प्रकार भक्ति का प्रकाश भी चारों ओर प्रकाशित होता है अतः मनुष्य को ज्ञान का अभिमान नहीं करना चाहिए

भगवान ने ताड़का का जो कि एक महिला थी उसको मारा नहीं था बल्कि उसके अभिमान को मारा था और उसके अभिमान को मारने के बाद भगवान ने स्वर्ग लोक में विशेष स्थान दिया गया था अतः यह कहना गलत है कि महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए बल्कि उसके अभिमान का अपमान करना चाहिए और उस अभिमान को दूर करना चाहिए

 

आज खरसिया में श्रीराम कथा पर प्रवचन कर रहे श्री राजन जी महाराज द्वारा उक्त बातें पत्रकार वार्ता में कही उन्होंने कहा कि खरसिया के लोगों में भक्ति भाव को देखकर ऐसा लग रहा है कि मानो उनके प्रवचन खरसिया में नहीं बल्कि अयोध्या में हो रहे हैं!

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