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छत्तीसगढ़

शिक्षा का अधिकार अधिनियम:कोरोनाकाल केे दो साल बाद अब आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या डेढ़ गुना बढ़ी

जांजगीर: कोरोना संक्रमण काल गुजरने के बाद शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश लेने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आरटीई के तहत प्रवेश लेने वालों की संख्या करीब डेढ़ गुनी बढ़ गई। कोरोना काल के बाद छात्रों की संख्या में इजाफा होने के साथ आरटीई के तहत इस बार प्रवेश लेने में अभिभावक भी उत्सुकता दिखा रहे हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र में 1757 सीटें खाली रह गई, जबकि इस साल शैक्षणिक जिला जांजगीर-चांपा में 4 हजार 850 सीटों में प्रवेश के लिए 5711 लोगों ने आवेदन किया है।

शैक्षणिक जिला जांजगीर-चांपा में 443 प्राइवेट स्कूल संचालित है। इन स्कूलों में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत कमजोर और गरीब वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2022-23 में आरटीई के तहत एडमिशन के लिए 17 मार्च से 15 मई तक अभिभावकों से ऑनलाइन आवेदन मंगवाए गए।

शैक्षणिक जिला जांजगीर-चांपा में नए शिक्षा सत्र में आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में 4850 सीटें अलाट की गई। इन सीटों के लिए 5711 आवेदन आए हैं, जो पिछले दो साल की अपेक्षा कही अधिक है। हालांकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 15 मई के बाद से बंद हो गई है।

दो साल के बाद एक बार फिर से निजी स्कूलों में आरटीई की सीटों के लिए इस बार होड़ मची है। पिछली बार आरटीई में एडमिशन के लिए 4959 सीटें थी, लेकिन इस दौरान कम लोगों ने ही आवेदन किया, जिसके कारण 1757 सीटें खाली रह गई थीं, लेकिन इस बार सीटों की तुलना में आवेदन अधिक मिलने से प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश अधिक होने के उम्मीद है।

लॉटरी से नाम किए जाएंगे फेल

जिले में शहरी क्षेत्र के स्कूलों में ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में आरटीई सीटों में अधिक आवेदन वेबसाइट में जमा किए गए हैं। इन स्कूलों के लिए सीटें आबंटन के लिए लॉटरी निकाली जाएगी। दूसरी ओर कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें सीटों की तुलना में आवेदन कम मिले हैं। इसके कारण कई स्कूलों के लिए लॉटरी नहीं निकाली जाएगी। जिन विद्यार्थियों का नाम लाॅटरी में आएगा उनके पालकों को स्कूलों में दाखिले के लिए दस्तावेज सत्यापन के बाद सीधे सीटें आबंटित कर दिए जाएंगे।

आरटीई का यह फायदा – आरटीई के तहत राज्य के स्कूलों में बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर मुफ्त एडमिशन दिया जाता है। इसके अंतर्गत गरीब वर्ग के लाेगों के बच्चों को नि:शुल्क एडमिशन की सुविधा सरकार देती है, जिसमें बच्चे की शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। देश में बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने के लिए राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 लाया गया था, संसद ने 4 अगस्त 2009 को इस एक्ट को अधिनियम किया और यह एक अप्रैल 2010 को लागू हुआ।

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