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छत्तीसगढ़

दिल्ली महाधरना में शामिल होने शिवसेना पदाधिकारी चाम्पा से हुए रवाना

शिवसेना छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रमुख धनंजय सिंह परिहार के नेतृत्व में 20 व 21 जुलाई को छत्तीसगढ़ के विभिन्न मांगों को लेकर जंतर मंतर दिल्ली में दो दिवसीय महाधरना का आयोजन किया जाना सुनिश्चित किया गया है। जिसमें जांजगीर चाम्पा जिले से शामिल होने शिवसेना पदाधिकारी 18 जुलाई को उत्कल एक्सप्रेस से रवाना होंगे। जिसमें ओंकार सिंह गहलौत जिलाध्यक्ष, चंदन धीवर जिला महासचिव, ईश्वर साहू जिला महासचिव, दिलीप साहू जिला उपाध्यक्ष, देवनारायण साहू ब्लॉक प्रभारी अकलतरा, अभिनय सिंह ब्लॉक प्रभारी नवागढ़, अमित सोनी अध्यक्ष युवा सेना चाम्पा, द्वारिका प्रसाद साहू, हेमंत बरेठ, विकास शर्मा, महिला सेना लक्ष्मी महंत, भुखिन बाई, आरती बनाफर सहित शिवसैनिक शामिल है।

      जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह गहलौत ने बताया है कि छत्तीसगढ़ शिवसेना की मांगों में मुख्य रूप से यह है कि- (1) गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और मारने वाले पर हत्या का मुकदमा पूरे देश में दर्ज़ किया जाए इस आशय का कानून पारित किया जाए। (2) समान नागरिक संहिता लागु किया जाए, देश में सभी को समान अवसर मिले इस आशय का कानून पारित किया जाए। (3) सी ए ए और एन आर सी सारे देश के लिए इस आशय का कानून पारित किया जाए। (4) जनसंख्या नियंत्रण कानून सारे देश सभी वर्गों में लागु किया जाए, कानून के उलंघन होने पर उनके समस्त अधिकार छीन लिए जाए जैसे- पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी, लोन, सरकारी और प्राइवेट नौकरी भी जप्त किया जाये, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (5) जनसंख्या अनुपात में धार्मिक स्थल निर्माण अधिनियम बनाकर लागु किया जाए, खुद के निजी स्थलों का भी धार्मिक दुरूपयोग के लिए प्रतिबंधित किया जाये। देश में 8 लाख मुस्लिम धर्म स्थल हैं, जिनके अंदर और बाहर cctv कैमरे लगाए जाए। इसी के साथ हिन्दू या अन्य धार्मिक स्थलों में भी cctv कैमरे लगाए जाए, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (6) धार्मिक स्थल किसी भी धर्म के हों, उनका दुरूपयोग देश या एकता के विरुद्ध होने पर उक्त स्थल की पूर्ण तालाबंदी साथ ही राजसात करण किया जाये, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (7) सभी धार्मिक स्थलों को एक रूप देखा जाए, मदरसों को मौलवियों को सरकारी मदद बंद किया जाये और विदेशी फंड पूर्ण रूपेण बंद किया जाये, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (8) दंगो में शामिल दंगाइयों पर सख्त कार्यवाही हो, जिसमें नागरिकता ख़तम करना, सरकारी मदद से उन्हें और उनके सारे घर को प्रतिबंधित करना, वोट का अधिकार निषेध करना, आजीवन कारावास की सजा दोषियों के ऊपर लागु कानून, लागु करना, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (9) देश में उन प्रदेशों में जहां कानून का पालन उचित स्वरूप में नहीं हो रहा हो, जो देश हित से सम्बंधित कदम उठाने में कोताही बरती जा रही हो, और स्थानीय प्रशासन सहयोग न करता हो ऐसी स्थितियों के लिए ऐसा कानून पारित किया जाए जिससे असामान्य स्थिति में आई ए एस, आई पी एस पर केंद्रीय सरकार दखल दे कर लॉ एंड आर्डर लागु करवा सके। (10) कश्मीर में देश भर से, वहां बसने के इच्छुक जनसंख्या के लिए व्यवसायिक या घरेलु उपयोग के जमीन जायजाद पर सरकारी दरों से ज्यादा छूट दिया जाए, साथ ही प्रत्येक को आग्नेय हथियार का लायसेंस भी दिया जाए, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (11) खाने पीने का सामान, अनाज, खाने का तेल, बिजली दर पर मूल्य नियंत्रण केंद्रीय सरकार सख्ती से लागू करे, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (12) पेट्रोलियम पदार्थो पर से केंद्रीय और राज्यों के सरकारी करों को समाप्त किया जाए, जिससे आम जनता को जीवन जीने के लिए राहत मिलेगी, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (13) सारे देश में एक आबकारी कानून लागू किया जाए जिससे कोई भी राज्य इस विषय का उपयोग या दुरूपयोग न कर सके जिससे देश में एक जैसा ही आबकारी कानून मिले, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (14) देश की कुल आबादी को केंद्र सरकार द्वारा चिकत्सीय इंसोरेंस 20 लाख तक का दिया जाए, बच्चों की बारहवीं तक की शिक्षा सरकार की तरफ से प्रदान किया जाए, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 10 लाख की सहायता देश के समस्त नागरिकों को दी जाए, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (15) समस्त देश में टोल रोड का जाल बिछ गया है और सरकार की कमाई बहुंत बड़े स्तर की है, ऐसी स्थिति में गाड़ियों से रोड टेक्स लेना बंद करें, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (16) प्रदेश में आये हुए केम्पा फंड (वन सुधार वन विस्तार) में हो रही अनियमितताओं की जांच की जाए और दोषियों को कानून के तहत निरुध्ध किया जाये। पिछले कई शासन से यह फंड का दुरूपयोग सतत गति से जारी है और दुरूपयोग लगातार हो रहा है, इस आशय का कानून पारित किया जाए। (17) शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत लाखों बच्चों का एडमिशन हुआ है। रायपुर सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश के समस्त जिलों में हर वर्ष एक बच्चें को शासन के तरफ से 650 रूपये दिया जाना है, जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार का 40 प्रतिशत और केंद सरकार का 60 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ सरकार कहती है हम अपना दे दिए केंद्र सरकार बचा है पैसे देना इस कारण हम पालकों नही दे रहे कई सौ करोड़ रूपए अभी बाकी है केंद्र सरकार नही दे रही है, इस आशय का कानून पारित किया जाए। छत्तीसगढ़ के ऐसे जनहित विभिन्न मांगों को लेकर महाधरना दिल्ली में किया जाएगा।

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