Downlod GS24NEWS APP
छत्तीसगढ़

सिद्धू ने कोर्ट में किया सरेंडर:पटियाला जेल में बंद किए गए; रोड रेज केस में काटेंगे एक साल की कैद

रोड रेज केस में पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने पटियाला कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। वह साथ में कपड़ों से भरा बैग लेकर आए हैं। कोर्ट में सिद्धू के सरेंडर करने की कागजी कार्रवाई पूरी की गई। सिद्धू का माता कौशल्या अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। यहां सिद्धू ने गेहूं से एलर्जी की बात कही है। वहीं उनके पैर में एक बैल्ट भी बंधी है, जिसको लेकर भी उनके मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की गई। पुलिस उन्हें अब पटियाला सेंट्रल जेल लेकर पहुंच गई है। यह वही जेल है, जहां सिद्धू के कट्‌टर विरोधी बिक्रम मजीठिया ड्रग्स केस में बंद हैं। हालांकि सिद्धू कैदी हैं और मजीठिया अभी हवालाती हैं।

सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सरेंडर के दौरान सिद्धू ने किसी से कोई बात नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को क्यूरेटिव पिटीशन तत्काल सुनने से इनकार कर दिया। सिद्धू के वकीलों को उम्मीद थी कि दोपहर बाद फिर सुप्रीम कोर्ट के आगे अर्जेंट सुनवाई की मांग करेंगे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हुई।

इससे पहले, सिद्धू के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की पिटीशन पर जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा कि हम चीफ जस्टिस के पास मामले को भेज रहे हैं, वे ही इस पर सुनवाई का फैसला करेंगे। सिद्धू ने खराब स्वास्थ्य के आधार पर सरेंडर के लिए कोर्ट से एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

वहीं पंजाब में कांग्रेस के नेताओं ने सिद्धू का साथ छोड़ दिया था। हालांकि अब कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सिद्धू को फोन किया है। उन्होंने सिद्धू को भरोसा दिया कि कांग्रेस उनके साथ है। उन्होंने सिद्धू को मजबूत रहने के लिए हौसला बढ़ाया। सिद्धू को कांग्रेस में प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है।

  • 27 दिसंबर 1988 को सिद्धू का पटियाला में पार्किंग को लेकर 65 साल के बुजुर्ग गुरनाम सिंह से झगड़ा हुआ। सिद्धू ने उन्हें मुक्का मारा। बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई। सिद्धू और उनके दोस्त रूपिंदर सिंह पर गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ।
  • 1999 में सेशन कोर्ट ने सिद्धू को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। पीड़ित पक्ष इसके खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चला गया।
  • 2006 में हाईकोर्ट ने सिद्धू को 3 साल कैद की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
  • जनवरी 2007 में सिद्धू ने कोर्ट में सरेंडर किया। जिसमें उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बाद सिद्धू सुप्रीम कोर्ट चले गए।
  • 16 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को गैर इरादतन हत्या के आरोप में लगी धारा 304IPC से बरी कर दिया। हालांकि IPC की धारा 323, यानी चोट पहुंचाने के मामले में एक हजार जुर्माना लगा। इसके खिलाफ पीड़ित परिवार ने SC में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी।
  • 19 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू पर अपना फैसला बदलते हुए 323IPC यानी चोट पहुंचाने के आरोप में एक साल कैद की सजा सुना दी।

Related Articles

Back to top button