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दिल्ली पहुंचा मंदिर-बुलडोजर विवाद, मंदिर पर चिपकाया अतिक्रमण का नोटिस, स्थानीय लोगों…

राजस्थान (Rajasthan) के अलवर के बाद अब मंदिर और बुलडोजर (Bulldozer) का विवाद दिल्ली पहुंच गया है. दिल्ली (Delhi) में आप ने दक्षिण दिल्ली के श्रीनिवासपुरी के एक मंदिर (Temple) को हटाने संबंधी नोटिस भेजे जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है. इस संबंध में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से नोटिस (Notice) भेजा गया है. नोटिस मिलने के बाद से स्थानीय निवासी आक्रोश में हैं. इस संबंध में राजनीति भी शुरू हो गई है. बता दें कि श्रीनिवासपुरी दिल्ली के उन स्थलों में से एक है जिसका केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पुनर्विकास किया जा रहा है. श्रीनिवासपुरी के नीलकंठ महादेव मंदिर के एंट्री गेट पर केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से 13 अप्रैल को अतिक्रमण का नोटिस चिपकाया गया था.

नोटिस में लिखा गया है कि आपने श्रीनिवासपुरी की परियोजना स्थल पर उक्त धार्मिक संरचना का निर्णाण किया है. ये एक स्थापित तथ्य है कि ये भारत सरकार/एल एंड डू भूमि है और आपने इस सरकार भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा/ अतिक्रमण किया है.

मंत्रालय ने कहा कि मंदिर खाली हो

नोटिस में दिल्ली हाई कोर्ट के डब्ल्यूपी 5234/2011 भीम सेन और एआर बनाम एमसीडी और अन्य आदेश का भी हवाला दिया गया है. इसमें लिखा है कि मामले के ऊपर फैसला करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि मूर्तियों को स्थापित करने वाले हिस्से को छोड़कर अनधिकृत निर्माण को ध्वस्थ किया जा सकता है. एमओएचयूए नोटिस के अनुसार मंदिर को संभालने वालों को परिसर खाली करना चाहिए.

 

आप नेता पहुंचे

साई श्रद्धा समिति मंदिर के तहत पंजीकृत मंदिर 23 अप्रैल की शाम तक सुरक्षित था. हालांकि तोड़फोड़ की सूचना शनिवार दोपहर जंगल में आग की तरह फैल गई. महिलाओं समेत स्थानीय निवासी मंदिर पहुंचे और कहा कि वे एमओएचयूए के नोटिस को अस्वीकार करते हैं. इस बीच AAP की सीनियर नेता आतिशी ने एमओएचयू के नोटिस की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की और विरोध प्रदर्शन करने के लिए मौके पर पहुंचे.

2002 में हुआ था जीर्णोंद्धार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंदिर के पुजारी आचार्य रंजन प्रसाद पराशर ने बताया कि इस मंदिर का जीर्णोंद्धार 2022 में किया गया था. तब से मैं यहां का मुख्य पुजारी हूं. नीलकंठ महादेव मंदिर में स्थानीय लोगों की आस्था है. हमें केंद्र सरकार की एजेंसी से नोटिस मिला है. उन्होंने कहा कि नोटिस में कहा गयटा है कि मंदिर का निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया है. वहीं मंदिर ट्रस्ट का प्रबंधन करने वाली समीति से जुड़े लोगों ने कहा कि हम चाहते हैं कि मंदिर को छुआ तक ना जाए.

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