छत्तीसगढ़

सिंचाई विभाग के अफसरों ने जिसे अपनी जमीन बताया उस पर कॉलोनाइजर कर रहा था कब्जा

नई सिंचाई कालोनी के पीछे सिंचाई विभाग की खाली जमीन है, इस जमीन पर कॉलोनाइजर की नजर लगी है। पहले कॉलोनाइजर धनीराम बंजारे ने उसे अपनी जमीन बताकर चिह्नांकित किया तो सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति करते हुए उसे मना किया तथा सीमांकन कराने की बात कही थी, लेकिन कॉलाेनाइजर इसे मानने को तैयार नहीं हुआ।

गुरूवार की सुबह धनीराम बंजारे अपनी जमीन पर हक जताते हुए उस जमीन पर लगे पेड़ों की कटाई कराने लगा। इसकी जानकारी मिलने पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इसकी सूचना तहसीलदार को दी। सूचना मिलने पर तहसीलदार पवन कोसमा की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने धनीराम बंजारे को बिना सीमांकन के प्लाटिंग करने व पेड़ों को काटने पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

पखवाड़े भर पूर्व कॉलोनाइजर धनीराम बंजारे द्वारा लगभग नई सिंचाई कालोनी के पीछे स्वयं की जमीन होने का दावा करते हुए अवैध रुप से पेड़ों की कटाई कर घेरा लगाया जा रहा था, इसकी जानकारी मिलने पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शिकायत की। शिकायत मिलने पर नायब तहसीलदार सीता शुक्ला स्टाफ के साथ पहुंची और सीमांकन होने तक काम शुरू नहीं करने की चेतावनी दी, इधर दूसरी बार बेखौफ होकर कॉलोनाइजर धनीराम बंजारे द्वारा फिर से सिंचाई कालोनी के पीछे प्लाटिंग करने पेड़ कटवा रहा था।

अवैध रुप से विकसित हो रही कालोनी
छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के नियमानुसार किसी भी बिल्डर को जमीन की प्लाटिंग करने से पहले रेरा में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इसके अलावा प्लाट बेचने से पहले बिल्डर वहां जन सुविधाओं से जुड़ी चीजें पक्की नाली, पक्की सड़क, बिजली व पानी का इंतजाम, सीवर, खेल मैदान आदि की सुविधा उपलब्ध करायेगा, मगर जिला मुख्यालय सहित अन्य नगरीय निकायों में अवैध प्लाटिंग का खेल जोरों पर चल रहा है।

अब तक एक भी दलाल के खिलाफ नहीं हुई कार्रवाई

डेढ़ साल पहले शहर में अवैध प्लाटिंग की शिकायत मिलने के बाद तत्कालीन एसडीएम मेनका प्रधान व तत्कालीन तहसीलदार प्रकाश साहू द्वारा आरआई व पटवारी के साथ मिलकर मौका निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान प्लाटिंग अवैध पाए जाने पर एसडीएम कार्यालय से 52 दलालों को नोटिस दिया गया, मगर डेढ़ साल बाद किसी भी जमीन दलालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी है, जिसके कारण शहर में लगातार बेखौफ अवैध प्लाटिंग जारी है। उनके हौसले इतने बढ़ गए हैं कि अफसरों के रोकने या नोटिस देने का असर भी उन पर नहीं पड़ रहा है। जमीन पर अवैध कब्जे जारी है।

जमीन पर हो रहा था कब्जा मना किया गया है: ईई

कुछ लोगों द्वारा नई कालोनी के पीछे शासकीय जमीन पर अपनी जमीन होने का दावा कर पेड़ों की कटाई की जा रही थी, जिस पर आपत्ति करते हुए इसकी शिकायत तहसीलदार व एसडीएम से की गई थी। साथ ही उक्त जमीन के सीमांकन के लिए आवेदन भी दिया गया है। गुरूवार को िफर से उस जमीन पर पेड़ों की कटाई की जा रही थी। इसकी शिकायत राजस्व अधिकारियों से की गई थी। सीमांकन होने के बाद मामला स्पष्ट होगा।

सतीश सराफ, ईई, जल संसाधन विभाग

सीमांकन तक लगाई गई है रोक: तहसीलदार
नई सिंचाई कालोनी के पीछे अवैध रूप पेड़ कटाई की शिकायत मिलने पर मौका का निरीक्षण किया गया। शिकायत सही पाई गई। जांच के दौरान बिल्डर द्वारा नीम, परसा, बबूल सहित लगभग 3 से 4 पेड़ों की कटाई की जा रही थी। कॉलोनाइजर को निर्माण कार्य को बंद करते हुए जमीन का सीमांकन करने के बाद ही प्लाटिंग काटने का निर्देश दिया गया है।
पवन कोसम, तहसीलदार, जांजगीर

अतिक्रमण से घटी सिंचाई विभाग की जमीन

जांजगीर शहर में सिंचाई विभाग की दो आवासीय कालोनी है, लेकिन सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगातार शासकीय जमीन का रकबा भी घटने लगा है। शहर की नई और पुरानी कालोनी के चारों ओर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर अवैध रूप से पक्का मकान बना लिया है, लेकिन फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन है, हालांकि नई सिंचाई कालोनी के पास अतिक्रमण करने की रोकथाम के लिए पहली बार पहल की है।

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