छत्तीसगढ़

बालपुर में डिरेल हुई मालगाड़ी का असर:अप लाइन को सामान्य करने लगे 6.30 घंटे, कोल साइडिंग तक नहीं जा पाई 18

बिलासपुर रेल मंडल के लिए काफी महंगा साबित हुआ। बिलासपुर के साथ बालपुर-चांपा में मालगाड़ी डिरेल होने की घटना ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी, तो रेलवे को होने वाले राजस्व के फायदे से वंचित कर दिया। बालपुर किस जिस अप लाइन में मालगाड़ी शाम 5.30 बजे डिरेल हुई थी, उसे सामान्य स्थिति में लाने रेलवे की तकनीकी टीम को 6.30 घंटे लग गए।

रात 12 बजे तक उक्त रूट पर कोई गाड़ी आगे बढ़ पाई। इस अवधि तक बाधित रहने वाले ट्रैक के कारण कोयला साइडिंग तक इस अवधि में पहुंचने वाली 18 खाली मालगाड़ी को चांपा, जांजगीर-नैला, जयरामनगर, गतौरा व बिलासपुर से पहले के स्टेशनों में ही रोकना पड़ा। कोरबा से इन दिनों रोजाना 56 रैक कोयला बाहर भेजा जा रहा है, लेकिन कोल साइडिंग में समय पर खाली रैक के नहीं पहंुचने से महज 38 रैक कोयला ही डिस्पैच हो पाया। जिस तरह से पूरे देश के पावर संयंत्रों से कोयले की डिमांड आ रही है, उससे यह हादसा रेलवे की परेशानी और बढ़ा दी है।

45 डिग्री में झुलसते रहे खड़ी ट्रेन के यात्री
ट्रेनों के विलंब से चलने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। हद तो यह हो गई है कि लिंक एक्सप्रेस जो रायपुर से अपने निर्धारित समय से कोरबा के लिए रवाना हो गई, लेकिन यह गाड़ी कोरबा आते-आते ढाई घंटे विलंब हो गई।

यही नहीं इस गाड़ी में सफर करने वाले यात्रियों को रेलवे स्टेशन कोरबा में ट्रैक खाली नहीं होने से उरगा में आधे घंटे तक 45 डिग्री तापमान में झुलसना पड़ा। ट्रैक के खड़े होने पर पंखा तक नहीं चल रहा था। इससे लोग परेशान हुए।

550 रुपए हो गया मेमू का किराया
रविवार की रात बिलासपुर से कोरबा आने वाले यात्रियों टिकट के रूप में लगने वाला खर्च भले ही 50 रुपए था, लेकिन उन्हें 550 रुपए देना पड़ गया। अपलाइन पर मालगाड़ी डिरेल की घटना से मेमू लोकल को रेल प्रशासन चांपा में ही रद्द कर दिया।

इसके कारण उस ट्रेन में सवार लोगों को कोरबा आने के लिए टैक्सी का सहारा लेना पड़ा, जिसके लिए एक व्यक्ति को 500 रुपए देना पड़ा। परिवार के साथ सफर करने वालों को क्या परेशानी हुई होगी, समझा जा सकता है।

ट्रैक क्लीयर पर परेशानी दूसरे दिन भी बनी रही
रविवार रात 12 बजे भले ही बालपुर में ट्रैक को क्लीयर कर लिया गया, लेकिन यात्रियों की परेशानी अगले दिन सोमवार को भी बनी रही। क्योंकि रेलवे ने यहां से शाम 6.05 बजे छूटने वाली शिवनाथ एक्सप्रेस को कोरबा से बिलासपुर तक रद्द कर दिया था।

इस ट्रेन के यात्रियों की सुविधा के लिए लिंक एक्सप्रेस को 2 घंटे विलंब अर्थात शाम 6.15 बजे बिलासपुर तक पैसेंजर बनाकर चलाया गया, जिसमें शिवनाथ के यात्रियों को सफर कराया गया। लिंक एक्सप्रेस के यात्री एक्सप्रेस का किराया देकर बिलासपुर तक पैसेंजर में सफर करने मजबूर हुए।

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