देश-विदेश

‘जिन्होंने छोड़ दिया बालासाहेब ठाकरे का साथ, वो हमें ना पढ़ाए हिंदुत्व का…

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray MNS) ने आज (4 मई, बुधवार) बालासाहेब ठाकरे का एक पुराना वीडियो ट्वीट किया. उन्होंने खास तौर से शिवसेना पार्टी प्रमुख को यह याद दिलाया कि बालासाहेब खुद मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवाने की मुहिम चला चुके हैं. राज ठाकरे का उद्धव ठाकरे से यह सवाल है कि वे बालासाहेब की सुनेंगे या शरद पवार की? इसका जवाब शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut Shiv Sena) ने दिया है. मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए संजय राउत ने कहा, ‘जो बालासाहेब ठाकरे के जीते जी उनका साथ छोड़ गए वे हमें बालासाहेब ठाकरे की याद ना दिलाए. जिस बीजेपी ने शिवसेना की पीठ पर खंजर घोंपा उस बीजेपी की गोद में जाकर बैठने वाले को कितना बालासाहेब ठाकरे की याद है. यह पता करना पहले जरूरी है.’

शिवसेना पर राज ठाकरे और बीजेपी का आरोप है कि हिंदुत्व छोड़ कर सूडो सेक्यूलरवादियों के साथ यह मिल गई है. इस पर संजय राउत ने कहा, ‘ सेक्यूलर पार्टियों को फर्जी बताने वालों का हिंदुत्व फर्जी है. राज ठाकरे आज जिस स्कूल के मास्टर से हिंदुत्व सीख रहे हैं, उन मास्टरों के हिंदुत्व की डिग्री फर्जी है. रियल हिंदुत्व सिर्फ शिवसेना का है जो शिवसेना ने बालासाहेब ठाकरे और वीर सावरकर से सीखा है. शिवसेना की आत्मा में हिंदुत्व है.’

‘लाउडस्पीकर पर किस बात का आंदोलन, कहां है आंदोलन?…मुझे तो दिखाई नहीं देता’

संजय राउत ने कहा, ‘मुंबई और महाराष्ट्र में कहीं भी लाउडस्पीकर को लेकर कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा है. ना ही सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस की अवहेलना हो रही है. और कहीं ऐसा हो रहा है तो इससे निपटने में राज्य प्रशासन सक्षम है. इसलिए महाराष्ट्र में आंदोलन की जरूरत नहीं थी. वैसे भी आंदोलन कहां है, मुझे तो दिखाई नहीं दे रहा. जब आंदोलन शुरू ही नहीं हुआ तो सफल होने की बात कहां आती है? जब कोई मुद्दा ही नहीं है तो आंदोलन की जरूरत कहां है? आंदोलन सिर्फ धमकी देने को नहीं कहते हैं. आंदोलन क्या होता है यह शिसेना से सीखिए. शिवसेना का जन्म ही आंदोलन की कोख से हुआ है. शिवसेना ने पचास सालों तक आंदोलन ही किया है. राज्य में ठाकरे सरकार है. इसलिए सड़कों पर नमाज को लेकर क्या करना है और लाउडस्पीकर को लेकर क्या फैसला करना है, यह हमें कोई ना सिखाए.’

 

संजय राउत ने कहा, ‘राज ठाकरे ने बालासाहेब को समझा नहीं है. बालासाहेब ठाकरे ने लाउडस्पीकर और सड़कों पर नमाज को लेकर आह्वान किया था लेकिन साथ ही समाधान भी दिया था. सभी जगह लाउडस्पीकर बंद करने का क्या मतलब है. हम अपने भजन कीर्तन को लेकर भी लाउडस्पीकर लगाते हैं. ये सब भी बंद कर दें क्या? ‘

Related Articles

Back to top button